शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

पैगाम उस के नाम



टुटा हुआ शीशा फ़िर जोड़ा नही जाता


आँख से निकला हुआ आंसू फ़िर वापस नही आता


तुम तो कह कर भूल चुके हो सब कुछ


लेकिन मुझसे वो पल भुलाया नही जाता


तेरी मोहोब्बत ने जंजीरे डाली हे ऐसी


की भुलाना भी चाहू तो भुलाया नही जाता


महफ़िल में भी मुज को तन्हाई नज़र आती है


तेरे बिना ये दिल कही और लगाया नही जाता


मेरे दिल की दीवारों पर सिर्फ़ तेरा ही नाम हैं


मिटाना भी चाहू तो मिटाया नही जाता


साँस रुकने से पहले एक जलक दिखा जाना

बेवफा जिंदगी का एतबार किया नही जाता


*********प्यार का पैगाम ************प्यार के नाम
राहुल कुमार पचोरी



3 टिप्‍पणियां:

  1. sundar rachna...lagta hai bewfai me haale dil kafi achcha prastut kiya....


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  2. राहुल भाई ऐसे नहीं चलेगा
    कोपी करते हो यार-
    मेवाडी मे एक कहावत है "एक घर तो डाकण भी छोडे है"
    कम से कम मेरा तो ख्याल किया होता

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